Wednesday, January 30, 2013

Capital punishment in India


Capital punishment is a legal but rarely carried out 
sentence in India. Imposition of the penalty is not always
followed by execution (even when it is upheld on appeal),
because of the possibility of commutation to life
imprisonment. Since 1995 it has been used only three times,
on Auto Shankar in 1995, Dhananjoy Chatterjee in 2004, 
and Ajmal Kasab in 2012.

Wednesday, June 01, 2011

हर एक्सपीरिएंस कुछ न कुछ बोल जाता है




कल दोपहर को एक भिखारी आया जिसे मैं ने दो रुपये दिये. उसने झुक कर ऐसा प्रणाम किया जैसे मैं ने सारी दुनियां उसकी झोली में डाल दी हो. भीख को अपना हक मानने के बदले उसे एक एहसान मानने वाले भिखारियों को मैं काफी उत्सुकता से देखा करता हूँ. कल भी ऐसा ही हुआ.


खिडकी से देखा तो वह तो फाटक के बाहर बैठ पैसा गिनता दिखा. पास जाकर देखा तो कम से कम सौ दोसौ रुपये का अनुमान बैठा. मैं चूँकि सिक्कों का शौकीन हूँ, और चूँकि लोग घर मे इधरउधर पडे पुराने सिक्के भिखारियों को दे देते हैं अत: उन सिक्कों की विविधता को सोच कर मैं ने पूछा  कि सिक्कों के बदले नोट दे दूँ तो उस ने मना कर दिया.
कारण पूछा तो बोला कि (मेरे घर से लगभग 10 किलोमीटर दूर) एक होटल वाला उससे सारे खुले पैसे लेकर नोट दे देता है और हर 100 रुपये पर उसे एक खाना मुफ्त देता है. मुझे एकदम लगा कि दोनों ही लोग अकलमंद हैं. एक आदमी जिसके पास न आगे कुछ है न पीछे उसे 10 किलोमीटर चलने में कोई तकलीफ नहीं है. भिक्षाटन भी हो जाता है, 10 किलोमीटर की कवायद से शरीर को भी फायदा होता है. अंत में 21 रुपये का खाना मुफ्त मिल जाता है, कमाये पैसे उसकी जेब में सुरक्षित रह जाते हैं.
होटल वाला भी अकलमंद है क्योंकि बैंक का चक्कर लगाये बिना उसे इतने खुले पैसे मिल जाते हैं कि एक चाय पीने के बाद कोई ग्राहक बीस का नोट दे दे तो भी बिन झुंझलाये उसे बाकी पैसे दे सकता है. किसी होटल में दोचार भिखारियों को दोपहर का खाना खिला देने से उनको कोई अतिरिक्त खर्चा नहीं बैठता है, खासकर जब भिखारी को खाना सिर्फ आखिर में दिया जाता है.
काश हम में से हरेक अपने जीवन की समस्याओं को इतने व्यावहारिक तरीके से सुलझा पाता!!
Tuesday, March 01, 2011

बजट से हमे क्या मिला....

प्रणब जी के सारे वादे खोकले साबित हुए लेकिन बजट कई मायनो में आछा साबित हुआ. मार्केट के विश्लेषको का मानना है की बजट में जो कुछ छूट मिली है वो मार्केट के हिसाब से देखते है कैसे :

मिडल क्लास में रहने वालो का सालाना बजट 1 से जयादा होता है ऐसे में परिवार के सदस्य 4 या 5 हुए तो इसकी कीमत 2 लाख पहुच जायगी और आम जनता बजट से दूर रहे जायगी.

बजट किसके लिए होता
क्या सिर्फ बजट अपर या लोवर क्लास के लिए होता है? 
इस बार बजट में सिर्फ दिखा इन्वेस्टर्स का बोल बाला 


बजट क्या होता है 
बजट सिर्फ इन्वेस्टर के लिए होता है विदेशी मूत्र का आदान प्रदान ही बजट है. देश में रोजाना उनेम्प्लोय्मेंट की सखया बदती जा रही है लेकिन बजट में सिर्फ दिखा की विदेशो में निवेश कैसे किया जाय ऐसे में बजट हमसे दूर हुआ  

भारत में किसी भी डिपार्टमेंट में देख लो पक्की या कच्ची नौकरी की बजाये ठेके की नौकरी जायदा मिल रही है. चाहे वे कही भी हो ऐसे में यौन्ग्स्टर को उम्मीद थी की ठेके को बंद करने का प्रावधान चलाया जायगा लेकिन ऐसा  बिलकुल भी नहीं हुआ 

आखिर क्या हम ठेके की नौकरी ही करके ?????????

बजट से हमे क्या मिला....


Wednesday, November 10, 2010

एक पति की सौ पत्नियाँ

आज एक समाचार पत्र पढ रहा था तो एक बात बडी खटक गई. लेख प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी के बारे में था. लेखक का कहना था कि प्रधान-मंत्री से बडी उम्मीदें थीं, लेकिन वे यह नहीं कर पाये या वह नहीं कर पाये. पढ कर बडा विचित्र लगा.
आप न वह प्रतियोगिता देखी होगी जिसमें आदमी को कमर तक एक बोरी में डाल कर कमर पर उसे बांध दिया जाता है. अब उस से दौडने को कहा जाता है. कोई भी व्यक्ति दो कदम से आगे नहीं बढ पाता है. दर्शक लोग तमाम तरह की बाते कहते हैं कि ऐसा करो या वैसा करो. कुछ बेवकूफ आप बोरियों में कूद जाते हैं, कमर पर बंधवा लेते हैं  और दो कदम के बाद ऐसे गिरते हैं कि आगे कभी किसी को कोई सुझाव न देने की सोच कान पकड लेते हैं.
यह इस देश की विडंबना है कि जिस आदमी को भी जिम्मेदारी के पद पर बैठा दिया जाता है उसे कोई भी निर्णय लेने के लिये सौ लोगों के अनुमति की जरूरत होती है. दायें जाओ तो एक सहयोगी पार्टी नारज होती है, बायें जाओ तो दूसरी, सीधे जाओ तो तीसरी. कहीं न जाओ तो जनता नाराज होती है. अफसोस यह है कि सहयोगी न हों तो सरकार नहीं “बन” सकती, लेकिन सहयोगी हों सरकार नहीं “चल” सकती! हां किनारे खडे लोग एक से एक सुझावे देते जाते हैं क्योंकि वे कभी पाले में नहीं उतरे हैं. सुझाव देने के लिये न तो अकल की जरूरत होती है न समझ की......  
Thursday, October 07, 2010

हिन्दी मात्रभाषा है या मात्र भाषा

हम अक्सर कहते है की हिन्दी हमारी मात्र भाषा है , लेकिन यह कहा तक सही है, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है जब हिन्दी दिवस आता है तो इसके दिवस पर कार्यक्रम करते है l आज हिन्दी के लिए मनाने की जरूरत नही अपनाने की जरूरत है l जिस प्रकार से सरकारी कार्यालयों में हिन्दी में जारी होने वाले पत्रचार को अंग्रजी में किया जा रहा है कार्यालयीय भाषा के रूप में अंग्रजी का प्रयोग हिन्दी से ज्यादा हो रहा है l किसी भी शंका को दूर करने के लिए अंग्रजी संस्करण का अवलोकन करते है lआज सरकारी दफ्तरों में कुछ हद तक तो हिन्दी का प्रयोग किया जा रहा , परन्तु निजी संस्थानों में बिलकुल प्रयोग नही किया जा रहा l वह वारत्व में शर्मनाक है l आज इस्थ्ती यह है की जब दो लोग आपस में बात करते है तो हिंदी से जादा अंग्रजी का इस्तेमाल करते है l लोगो को हिंदी बोलने में शर्म आती है lबच्चो को अंग्रजी जरुर सिखाये और उन्हें अंग्रजी माध्यम स्कूलो में जरुर पठाए लेकिन ऐसा भी न हो की बच्चे हिन्दी को कखग और गिनती भी न शीख सके l हिन्दी भारत की पहचान है इससे भारत की पहचान को भी झटका लगेगा l हिन्दी भाषी देश में हिन्दी की दशा दयनीय है l 

Thursday, September 23, 2010

अब सच में मुन्नी हुयी "झंडूबाम"./.ये आज की बात नहीं ..... रोज की मोहब्बत हैं !!











फिल्‍म ‘दबंग’ के हिट गाने ‘मुन्‍नी बदनाम हुई... मैं झंडू बाम हुई डार्लिंग तेरे लिए’ में अपने उत्‍तेजक लटकों-झटकों से दर्शकों को मदहोश कर देने वाली ‘मुन्‍नी’ यानि मलाइका अरोड़ा खान सचमुच में झंडू बाम होने जा रही हैं। कहने का मतलब ये है कि मलाइका अब झंडू बाम का ब्रांड अंबेसेडर बनने जा रही हैं।


मीडिया में आईं खबरों के मुताबिक ये फैसला उस विवाद की परिणति है, जिसमें ‘झंडू बाम’ बनाने वाली कंपनी ‘झंडू बाम फार्मास्‍यूटिकल वर्क्स लिमिटेड’ ने फिल्‍म ‘दबंग’ के निर्माता अरबाज खान पर मुकदमा दर्ज किया था कि गाने के माध्‍यम से उसके ब्रांड की छवि खराब की जा रही है।


खबरों के मुताबिक, अरबाज खान प्रोडक्‍शंस (एकेपी) और झंडू बाम बनाने वाली कंपनी ‘झंडू बाम फार्मास्‍यूटिकल वर्क्स लिमिटेड’ के बीच कोर्ट के बाहर सुलह हो गई है। इस संबंध में अरबाज खान का कहना है, ‘सबकुछ न्‍यायालय के बाहर मित्रतापूर्ण ढंग से सुलझा लिया गया है। इसके‍ लिए मैं विज्ञापन निर्माता प्रह्लाद कक्‍कड़ को शुक्रिया अदा करता हूं। वे दोनों पक्षों को जानते हैं और उन्‍होंने इस मामले को निपटाने के लिए बातचीत की पहल की।’


अरबाज ने आगे कहा, ‘यह दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद रहा। हम उनकी कंपनी के साझ गठबंधन करेंगे। मलाइका उनकी ब्रांड अंबेसेडर होगी।